जो करो मंज़ूर है….जो भी कहो मंज़ूर है… दिल दिया था तो शर्त नहीं थी …आज भी कोई शर्त नहीं है !!
पाने की ज़िद कभी थी नहीं…तो खोने का गम कैसा ? तुम्हे अपना कहते रहे…और इस दिल से कुछ कहा नही !!
खोना क्या और पाना क्या….तेरे साथ हम बस ऐसे ही रहते है… तुम खुश रहो …ऐसा बस दुआओं में कहते है !! चाहत ऐसी कभी ज्यादा की थी नहीं… बस तेरे दिल में रह लेते है !
क्या कहना है…उन सन्नाटो से ?? कुछ भी कहने की अब ज़रूरत नहीं !!
आते जाते ज़िन्दगी बहुत कुछ सीखा रही है… तुम्हे हर बार प्यार के रंगों से मिला रही है !!
तुम्हे कबूल हो के नही ? तेरे सपनों से हम गुज़रा करते है… तेरे पास हर बार कुछ नयी सी हम दिखते है !!
अच्छी लगती है ये ज़िन्दगी !! कहानी नई – नई हर रोज़ कहती है ये ज़िन्दगी …
ज़िन्दगी तुम जो भी कहो मंज़ूर है !! बस एक गुजारिश है…
खुद से …खुदा से…वक़्त से…हालात से… अपनी बेचैनी से …अपनी उम्मीद से… न जाने कब किससे…क्यों ये शिकायत ?? बस ये शिकायत है !!
क्यों ये कहते हुए ख़ामोशी से शिकायत… क्यों ये रहते हुए ज़िन्दगी से शिकायत… क्यों ये बहते हुए आँसू से शिकायत… क्यों ये जाते हुए प्यार से शिकायत… क्यों ये आते हुए गुस्से से शिकायत… क्यों ये छोटी -छोटी मुश्किलों से शिकायत… क्यों ये दूर रहते रिश्तों से शिकायत…
क्यों है ये शिकायत ?
बस खुद से कह दे …के कुछ नहीं पाने की है चाहत… कुछ खोने का गम नहीं… कोई पास हो उसकी आरज़ू नहीं … बस खुद से उम्मीद है…शिकायत भी खुद से… ज़िन्दगी साँसों से बंधी रहे …ज़िन्दगी बस यूँहि बीत जाए !!
कहना क्या और सुनना क्या… बस आँसू आँखों से कुछ कह दे… दिल थोड़ा सा मुस्कुरा दे… दूर जो है वह पास आकर कुछ सुना दे… आरज़ू बस दिल के कोने में … सूकून से सपने में खो जाए !!
कहते है – जब बात खुद की हो तो शिकायत भी अपनी सी लगती है… कुछ कहती नहीं है…बस खुद में सिमट के रह जाती है !!
जब तक शिकायत है … प्यार भी है और नफरत भी !! ज़िन्दगी भी है … और उम्मीद भी !!
जब चाँद को देख रहे थे… तो लगा जैसे खुद को देख रहे थे।।
अँधेरे में चमक इतनी खूबसूरत थी… के लगा खुद को आईने में देख रहे थे !
थोड़ी तो दाग दिखी चाँद में … लगा जैसे तजुर्बा बयान कर रही थी… न जाने कितने दर्द लिए मुश्कुरा रही थी !
कहीं हमारी तरह ही खुद को दर्द में लपेटकर… अपने सिर्फ उजाले दिखा रही थी !
काले बादल में सितारों के साथ…खूब बातें कर रही थी… सितारों को देख …हमें भी दोस्तों की याद आ रही थी !
चमकते सितारों की तरह, हमारी ऑंखे चमक रही थी… यादें बुन रही थी और बातें गुनगुना रही थी !
चाँद को देख समझ आयी एक बात – चाँद की खूबसूरती आँखों से नहीं…दिल से दिखती है… और इंसान की खूबसूरती दिल से होती है ।।
चाँद से बातें तो रोज़ होती हैं – इज़हार चाँद से ..चाँद के साथ ..प्यार और तकरार की बात… इंतज़ार की बात …करीब आने की बात …दूर जाने की बात… कुछ है कुछ और पाने की बात … ख़ुशी और गम की बात… मेरी और तुम्हारी बात … कितना कुछ है उस चाँद के साथ …..!!
वक़्त के साथ सब कुछ बदल रहा है … ये सोच के दिल बस ….तेरे साथ हर लम्हा गुज़ार रहा है… ईद का चाँद हो या करवा चौथ का …बस चाँद का इंतज़ार हमेशा दिल से होता है।।
इसलिए शायद… हम चाँद के करीब है… इंतज़ार भी करते है , और रात की खामोशी में सुकून से, साथ रहते है… चाँद की तरह बस दूसरो को खुश देखकर खुश होते है ।।
जब चाँद ढलने लगता है तो बहुत कुछ कहता है – अपने को ऐसा बना के रखना…के आपको लोग हमेशा देखना चाहे… इंतज़ार ही सही, पर आपको देखने के लिए हमेशा वक़्त का इंतज़ार करे !!
पूरा या आधा चाँद …आकाश की खूबसूरती चाँद से होती है… रात में सही …कभी आँखे बंद में…कभी खुली में … चाँद हमारे साथ …हमारे पास होता है।।
जब चाँद को देख रहे थे… तो लगा खुद को देख रहे थे !!