Mehfil


यूँ महफ़िल में आ गए तेरे…
लगा के, देख के तुमको सुकूॅं मिलेगा!!

जब नज़र आये तुम तो जज़्बात यादो तक पहुँच गए…
और हम ख्यालो में बहते चले गए!!

जब नज़र मिली तुमसे महफ़िल में…
नज़रे तुम में कहीं गुम हो गई!!

दिल ने चाहा बहुत के नज़र झुका ले…
पर हिम्मत फिर से –
गुम होने की हुई नहीं…

पर हिम्मत फिर से –
तुम्हें खोने की हुई नहीं!!

15 thoughts on “Mehfil

  1. माश़ाअल्लाह क्या कहने-हिम्मत फिर गुम होने की हुई नहीं…तुम्हें फिर खोने की हुई नहीं।

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