Ehsaas


उस एहसास को, फिर से जीने को मन करता है,
वो पल में, फिर से रहने को मन करता है!!

वो साँसों में तेरी खुशबू के, आने और जाने में…
रहने का मन करता है…

तन्हाई को दूर छोड़कर…
फिर से ज़िन्दगी को जीने का मन करता है!!

Tere saath


मैं तेरे साथ हूँ… जहाँ भी तू है,
आँखें नम ही सही… तू मुझमें ही है।।

कहने को बहुत कुछ है… पर शब्द नहीं है…
ये एक एहसास है… सुना है तुमसे ही है।।

Kaaid


तुमने जज़्बात लिखे भी और इज़हार भी किया…
पर जब कहने की बात आई तो…
शब्दों में ही सिर्फ हमें कैद कर दिया।।

Daayrein


दायरे कैसे है… क्यों है… किस लिए है?
खुद को हम जहाँ रोक न सके…
बस दायरे… उनके लिए है!