मन में रहती है मन की बात…
यूँ तो हर दिन कहती है कई बात…
सुन के कभी दिल, मुस्कुराता है… तो कभी आँसू छलकाता है…
मन में रहती है मन की बात…
दिल के तार छेड़ जाती है कई बात!!
कभी आँसू … कभी खिलखिलाहट… कभी मुस्कुराहट…
जोड़ देते है कई तार…
कभी सिर्फ मन में रह जाती है मन की बात!!
चुप हो जाती है कई बार बस यूँ ही… दिल की बात!!
अपनों को देख न जाने क्यों… मचल जाती है मन की बात…
और राज़ कहने लगती है आँखों से… मन की बात!!
मन है जो हर बार कहता है दिल की बात…
दिल ने सँभाल रखा है, राज़ की बात!!
जज़्बात हर बार दिल को जोड़ता है…
रोक के दिल में सवाल और जवाब की बात…
मन में रहती है मन की बात…
दिल के तार छेड़ जाती है कई बात!!
