Ehsaas


उस एहसास को, फिर से जीने को मन करता है,
वो पल में, फिर से रहने को मन करता है!!

वो साँसों में तेरी खुशबू के, आने और जाने में…
रहने का मन करता है…

तन्हाई को दूर छोड़कर…
फिर से ज़िन्दगी को जीने का मन करता है!!

Zindagi hai toh sab kuch hai


कुछ कही सुनी बातें,
कुछ बोली भी नहीं और समझ गयी बातें…
कुछ बस सोच ही रहे थे और हो गयी बातें…
कुछ कह रहे थे और किसी ने कह दी बातें।।

बस यूं ही –
कुछ बातें, कुछ मुलाकातें, कुछ ज़िन्दगी, कुछ ख़्वाब,
कुछ सच, कुछ कल्पना में…

हम सब खुद को ढूढ़ते रहते है।।
सोचते रहते है… कुछ पाने की कोशिश करते रहते है।।

तलाश खुद की हमेशा रहती है…
सवालों के जवाब हमेशा ढूढ़ती रहती है।।
शोर में ख़ामोशी और ख़ामोशी में खुद को,
आवाज़ देती रहती है।।

शहर खूबसूरत है… हम भी है, तुम भी हो, 
ख्वाइशें भी है!!

बस ज़िन्दगी है तो सब कुछ है…
ज़िन्दगी है तो सब कुछ है।।

Tere saath


मैं तेरे साथ हूँ… जहाँ भी तू है,
आँखें नम ही सही… तू मुझमें ही है।।

कहने को बहुत कुछ है… पर शब्द नहीं है…
ये एक एहसास है… सुना है तुमसे ही है।।

Kaaid


तुमने जज़्बात लिखे भी और इज़हार भी किया…
पर जब कहने की बात आई तो…
शब्दों में ही सिर्फ हमें कैद कर दिया।।

Daayrein


दायरे कैसे है… क्यों है… किस लिए है?
खुद को हम जहाँ रोक न सके…
बस दायरे… उनके लिए है!