कुछ कही सुनी बातें,
कुछ बोली भी नहीं और समझ गयी बातें…
कुछ बस सोच ही रहे थे और हो गयी बातें…
कुछ कह रहे थे और किसी ने कह दी बातें।।
बस यूं ही –
कुछ बातें, कुछ मुलाकातें, कुछ ज़िन्दगी, कुछ ख़्वाब,
कुछ सच, कुछ कल्पना में…
हम सब खुद को ढूढ़ते रहते है।।
सोचते रहते है… कुछ पाने की कोशिश करते रहते है।।
तलाश खुद की हमेशा रहती है…
सवालों के जवाब हमेशा ढूढ़ती रहती है।।
शोर में ख़ामोशी और ख़ामोशी में खुद को,
आवाज़ देती रहती है।।
शहर खूबसूरत है… हम भी है, तुम भी हो,
ख्वाइशें भी है!!
बस ज़िन्दगी है तो सब कुछ है…
ज़िन्दगी है तो सब कुछ है।।
